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सुशांत की जिंदगी पर बन रहीं फिल्मों को चुनौती:दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्ममेकर्स को भेजा नोटिस, सुशांत के पिता ने की है फिल्मों पर रोक लगाने की मांग

दिवंगत सुशांत सिंह राजपूत की जिंदगी पर फिल्में बना रहे या एलान कर चुके प्रोड्यूसर्स को दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने यह नोटिस सुशांत के पिता केके सिंह द्वारा फाइल की गई उस याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया, जिसमें उन्होंने फिल्मों में उनके बेटे के नाम या उससे मिलती -जुलती चीजों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की थी।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने फिल्ममेकर्स को नोटिस जारी कर 24 मई तक अपना पक्ष रखने को कहा है।

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मुकदमे में कई फिल्मों के नाम शामिल

केके सिंह के वकील विकास सिंह द्वारा फाइल की गई इस याचिका में सुशांत की जिंदगी पर बेस्ड कुछ फिल्मों जैसे 'न्याय : द जस्टिस', 'सुसाइड ऑर मर्डर : अ स्टार वॉस लॉस्ट', और 'शशांक' का नाम भी शामिल किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि सुशांत के केस की जांच चल रही है और अगर ऐसे में इस तरह की फिल्में आती हैं तो मामले पर निगेटिव प्रभाव पड़ सकता है। याचिका के मुताबिक, इन फिल्मों को देखने के बाद सुशांत केस को लेकर लोगों की धारणा बदल सकती है।


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फिल्ममेकर्स पर हालात का फायदा उठाने का आरोप

याचिका में लिखा है कि फिल्ममेकर्स हालात का फायदा उठा रहे हैं । वे गलत इरादे से मौके को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। सिंह ने आशंका जाहिर की है कि विभिन्न नाटक, फिल्में, वेब सीरीज, किताबें, इंटरव्यूज या दूसरे पब्लिश मटेरियल उनके बेटे के सम्मान को नुकसान पहुंचा सकते हैं। याचिका में सुशांत की फैमिली की मानहानि, मानसिक प्रताड़ना और शोषण के लिए फिल्ममेकर्स से 2 करोड़ रुपए से ज्यादा का हर्जाना भी मांगा गया है।

सुशांत से जुड़ा कंटेंट लेना निजता के अधिकार के खिलाफ

याचिका में यह दावा भी किया गया है कि फिल्में, वेब सीरीज, किताबें या इसी तरह के दूसरे कंटेंट, जिन्हें प्रकाशित या प्रसारित करने की अनुमति है, विक्टिम के अधिकारों और स्वतंत्र-निष्पक्ष जांच को प्रभावित करेंगे। क्योंकि यह पूर्वाग्रह पैदा कर सकते हैं।

याचिका में कहा गया कि राजपूत एक जानी-मानी हस्ती हैं। उनके नाम/इमेज/कैरिकेचर/ डायलॉग डिलीवरी की स्टाइल का किसी भी तरह का गलत इस्तेमाल उनके निजता के अधिकारों का उलंघन है। ये अधिकार अब उनके पिता के पास है, क्योंकि उनकी मौत के बाद वे ही उनके इकलौते कानूनी वारिस हैं।

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